Geography (भूगोल)

भूगोल की कुछ परिभाषाएँ :

1. "भूगोल एक ऐसा स्वतंत्र विषय है जिसका उद्देश्य लोगों को विश्व, आकाशीय पिंडों, स्थल, महासागरों, जीव-जन्तुओं, वनस्पति, फलों तथा भू-धरातल के क्षेत्रों में देखी जाने वाली प्रत्येक अन्य वस्तु का ज्ञान प्राप्त कराना हैं | (स्ट्रैबो )
2. " भूगोल पृथ्वी की झलक को स्वर्ग में देखने वाला आभामय विज्ञान है | " (कलैडियस, टॉलमी)
3. " भूगोल वह विज्ञान है, जिसमें पृथ्वी को स्वतंत्र ग्रह के रूप में मान्यता देते हुए उसके समस्त लक्षणों, घटनाओं एवं उसके अन्त:सम्बन्ध का अध्ययन किया जाता है | " ( कार्ल रिटर )
4. "भूगोल में पृथ्वी के उस भाग का अध्ययन किया जाता है, जो मानव के रहने का स्थान है | " (ऑर्थर होम्स )
भूगोल का जनक - हिकेटियस
वर्तमान भूगोल का जनक - अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट
व्यवस्थित भूगोल का जनक - इरैटॉस्थनीज
ज्योग्रैफिका शब्द का प्रथम प्रस्तावक - इरैटॉस्थनीज
भौतिक भूगोल का जनक - पोलीडोनियम
सांस्कृतिक भूगोल का जनक -कार्ल-ओ-सावर
गणितीय भूगोल के संस्थापक - थेल्स व एनेक्सीमींडर
विश्व ग्लोब का निर्माता - मार्टिन बैहम
विश्व मानचित्र के निर्माणकर्त्ता - अनेग्जी मेण्डर
भौगोलिक विश्वकोश का रचनाकार - स्ट्राबो

1. ब्रह्माण्ड अस्तित्वमान द्रव्य एवं ऊर्जा के सम्मिलित रूप को ब्रह्माण्ड कहते हैं | या दूसरे शब्दों में सूक्ष्मतम अणुओं से लेकर महाकाय आकाशगंगाओं (GALAXIES) तक के सम्मिलित स्वरूप को ब्रह्माण्ड कहा जाता है | ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से संबंधित प्रमुख सिद्धांत
1. महाविस्फोट सिद्धान्त (BIG-BANG THEORY)
2. साम्यावस्था या सतत सृस्टि सिद्धान्त या स्थिर अवस्था संकल्पना (STEADY STATE THEORY)
3. दोलन सिद्धांत (PULSATING UNIVERSE THEORY)
4. स्फीति सिद्धांत (INFLATIONARY THEORY)
2. सौरमंडल सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले विभिन्न ग्रहों, क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं, उल्काओं तथा अन्य आकाशीय पिंडों के समूह को सौरमंडल (SOLAR SYSTEM) कहते हैं | सौरमंडल में सूर्य का प्रभुत्त्व है, क्योंकि सौरमंडल निकाय के द्रव्य का लगभग 99.999 द्रव्य सूर्य में निहित है | तथा सौरमंडल के समस्त ऊर्जा का स्रोत भी सूर्य ही है | प्लेनेमस सौरमंडल से बाहर बिल्कुल एक जैसे दिखने वाले जुड़वाँ पिंडों का एक समूह है |

सौरमंडल के पिंड

अन्तर्राष्ट्रीय खगोलशास्रीय संघ (INTERNATIONAL ASTRONOMICAL UNION-IAU) की प्राग सम्मलेन-2006 के अनुसार सौरमंडल में मौजूद पिंडों को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में बाँटा गया है-
1. परम्परागत ग्रह : बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण।
2. बौने ग्रह : प्लूटो, चेरॉन सेरस, 2003 यूबी 313 ।
3. लघु सौरमंडलीय पिंड : धूमकेतु, उपग्रह, एवं अन्य छोटे खगोलीय पिंड।
नोट : ग्रह वे खगोलीय पिंड हैं जो निम्न शर्तों को पूरा करता हों-
1. जो सूर्य के चारों ओर घूमता (परिक्रमा करता) हो।
2. उसमें पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण बल हो जिससे वह गोल स्वरूप ग्रहण कर सके।
3. उसके आस-पास का क्षेत्र साफ हो यानी उसके आस-पास अन्य खगोलीय पिंडों की भीड़-भाड़ न हो। ग्रहों की उपर्युक्त परिभाषा आई. एन. यू. की प्राग सम्मेलन (अगस्त, 2006 ई.) में तय की गई है। ग्रह की इस परिभाषा के आधार पर यम (PLUTO) को ग्रह के श्रेणी से निकाल दिया गया फलस्वरूप परम्परागत ग्रहों की संख्या 9 से घटकर 8 रह गयी। यम को बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है।
ग्रहों को दो भागों में विभाजित किया गया है-
1. पार्थिव या आन्तरिक ग्रह (Terrestrial or Inner Planet): बुध, शुक्र, पृथ्वी एवं मंगल को पार्थिव या आन्तरिक ग्रह कहा जाता है, क्योंकि ये पृथ्वी के सदृश होते हैं।
2. बृहस्पतीय या बाह्म ग्रह (Jovean or outer planet): बृहस्पति, शनि, अरुण, व वरुण को बृहस्पतीय ग्रह कहा जाता है।

ग्रहों की जानकारी आकर, घनत्व, झुकाव आदि के अनुसार।

  1. आकर के अनुसार ग्रहों का घटते (बड़ा से छोटा ) क्रम है : बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल एवं बुध। अर्थात सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति एवं सबसे छोटा ग्रह बुध है।
  2. सूर्य से दूरी के अनुसार ग्रहों का क्रमहै : बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण। अर्थात सूर्य से सबसे निकट बुध एवं सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह वरुण है।
  3. घनत्व के अनुसार ग्रहों का बढ़ते (छोटा से बड़ा) क्रम है : शनि, अरुण, बृहस्पति, वरुण, मंगल एवं शुक्र।
  4. अपने अक्ष पर झुकाव के आधार पर ग्रहों का बढ़ते क्रम है : शुक्र, बृहस्पति, बुध, पृथ्वी, मंगल, शनि, वरुण एवं अरुण।
  5. परिभ्रमण काल के अनुसार ग्रहों का बढ़ते क्रम है : बृहस्पति, शनि, वरुण, अरुण, पृथ्वी, मंगल, बुध एवं शुक्र।
  6. परिक्रमण काल के अनुसार ग्रहों का बढ़ते क्रम है : बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण।
  7. नोट : शुक्र एवं अरुण को छोड़कर अन्य सभी ग्रहों का घूर्णन एवं परिक्रमण की दिशा एक ही है। यानि सभी ग्रह पश्चिम से पूर्व (Anticlock Wise) की ओर घूमता है जबकि शुक्र एवं अरुण पूर्व से पश्चिम(Clock Wise) की और घूमता है। तथा सूर्य भी पूर्व से पश्चिम (Clock Wise) की ओर घूमता है।
  8. द्रव्यमान के अनुसार ग्रहों का बढ़ते क्रम है : बुध, मंगल, शुक्र, पृथ्वी, अरुण, वरुण, शनि एवं बृहस्पति।

सूर्य (Sun )

सूर्य (Sun ) सौरमंडल का प्रधान है | यह हमारी मंदाकिनी दुग्धमेखला के केन्द्र से लगभग 30,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर एक कोने में स्थित है | यह दुग्धमेखला मंदाकिनी के केन्द्र के चारों ओर 250 किमी/से.की गति से परिक्रमा कर रहा है | इसका परिक्रमण काल (दुग्धमेखला के केन्द्र के चारों ओर एक बार घूमने में लगा समय 25 करोड़ (250 मिलियन )वर्ष है ,जिसे ब्रह्मण्ड वर्ष (Cosmos year )कहते है | सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है | इसका मध्य भाग 25 दिनों में व ध्रुवीय भाग 35 दिनों में एक घूर्णन करता है | सूर्य एक गैसीय गोला है ,जिसमें हाइड्रोजन 71%,हीलियम 26.5%एवं अन्य तत्व 2.5%होता है सूर्य का केन्द्रीय भाग क्रोड (Core ) कहलाता है | जिसका ताप 1.5*107 0C होता है | तथा सूर्य के बाहरी सतह का तापमान 60000C है | हैंस बेथ (Hans Bethe )ने बताया कि 107 ०C ताप पर सूर्य के केन्द्र पर चार हाइड्रोज़न नाभिक मिलकर एक हीलियम नाभिक का निर्माण करता है |

बुध (Mercury)

बुध (Mercury):
बुध पार्थिव या आन्तरिक (Terrestrial Or Inner Planet) ग्रह है।
यह सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह है, जो सूर्य निकलने के दो घंटे पहले दिखाई परते हैं।
यह सबसे छोटा ग्रह है, जिसके पास कोई उपग्रह (Satellite) नहीं है।
इसका सबसे विशिष्ट गुण है-इसमें चुम्बकीय क्षेत्र का होना।
यह सूर्य की परिक्रमा सबसे काम समय (88 दिनों ) में पूरी करता है। अर्थात् यह सौरमंडल सर्वाधिक कक्षीय गति वाला ग्रह है।
बुध के अक्ष का झुकाव सौरमंडल के अन्य किसी भी ग्रह से सबसे कम है (एक डीग्री का करीब 1⁄30), परंतु कक्षीय विकेन्द्रता सर्वाधिक है।
यहाँ दिन अति गर्म व रातें बर्फीली होती हैं। इसका तापान्तर सभी ग्रहों में सबसे अधिक (60000C) है। इसका तापमान रात में -1730C व दिन में 4270C होता है।
बुध तकरीबन 70% धातु व 30% सिलिकेट पदार्थ का बना है।
बुध का 5.427 ग्राम/सेमी3 का घनत्व सौरमंडल में उच्चतम के दूसरे क्रम पर है, यह पृथ्वी के 5.515 ग्राम/सेमी3 के घनत्व से मात्र थोडा सा कम है। यदि गुरुत्वाकर्षण संपीड़न के प्रभाव को गुणनखंडो में बांट दिया जाए, तब 5.3 ग्राम/सेमी3बनाम पृथ्वी के 4.4 ग्राम/सेमी3 के असंकुचित घनत्व के साथ, बुध जिस पदार्थ से बना है वह सघनतम होगा।

शुक्र (Venus)

शुक्र (Venus): यह पृथ्वी का निकटतम, सबसे चमकीला एवं सबसे गर्म ग्रह है।
इसे साँझ का तारा या भोर का तारा कहा जाता है, कयोंकि यह शाम में पश्चिम दिशा में तथा सुबह में पूरब की दिशा में आकाश में दिखाई पड़ता है।
यह सूर्य से दूसरा ग्रह है। और आकर (Shape) में 6वाँ बड़ा ग्रह है।
यह अन्य ग्रहों के विपरीत दक्षिणावर्त (Clockwise) पूरब से पश्चिम घूमती है।
इसे पृथ्वी का भगिनी ग्रह कहते हैं। क्योंकि यह घनत्व, आकार एवं व्यास में पृथ्वी के सामान (जैसा) है।
शुक्र ग्रह का कोई उपग्रह नहीं है।
इसका परिक्रमण काल 225 दिन है।
शुक्र का व्यास 12,092 किमी (पृथ्वी की तुलना में केवल 650 किमी कम) है।

पृथ्वी (EARTH)

पृथ्वी (EARTH): पृथ्वी, जिसे विश्व भी कहा जाता है, सूर्य से तीसरा तथा आकर (SHAPE) में पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है। रेडियोधर्मी डेटिंग और साक्ष्य के अन्य स्रोतों के अनुसार, पृथ्वी की आयु लगभग 4.54 बिलियन वर्ष हैं। तथा पृथ्वी का अक्ष उसके कक्षा-तल पर बने लंब से 231/20 (23030') झुका हुआ है।
पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह (NATURAL SATELLITE) चन्द्रमा (MOON) है।
इसका विषुवतीय व्यास 12,756 किमी. और ध्रुवीय व्यास 12,714 किमी. है।
यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व (ANTICLOCK WISE (घड़ी की विपरीत दिश में )) 1,610 किमी. प्रतिघंटा की चाल से 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकंड में एक पूरा चक्कर (परिभ्रमण) लगाती है। पृथ्वी की इस गति को घूर्णन या दैनिक गति कहते हैं। इस गति से दिन-रात होते हैं।
पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा (सूर्य के चारों और) पूरी करने में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकण्ड (लगभग 365 दिन 6 घंटे) का समय लगता है। इस समयावधि के दौरान परिक्रमा पूरी करने में पृथ्वी का माध्य वेग लगभग 30 किलोमीटर/सेकण्ड (29.8 किमी/से.) होता है। सूर्य के चतुर्दिक पृथ्वी के इस परिक्रमा को पृथ्वी की वार्षिक गति अथवा परिक्रमण कहते हैं। पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में लगे समय को सौर वर्ष कहा जाता है। प्रत्येक सौर वर्ष, कैलेण्डर वर्ष से लगभग 6 घंटा बढ़ जाता है, जिसे हर चौथे वर्ष में लीप वर्ष बनाकर समायोजित किया जाता है। लीप वर्ष 366 दिन का होता है, जिसके कारण फरवरी माह में 28 दिन के स्थान पर 29 दिन होते है। पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन, इसकी अक्ष पर झुके होने के कारण तथा सूर्य के सापेक्ष इसकी स्थिति में परिवर्तन यानी वार्षिक गति के कारण होती है। वार्षिक गति के कारण ही पृथ्वी पर दिन-रात छोटा-बड़ा होता है।
आकर एवं बनावट की दृष्टि से पृथ्वी एवं शुक्र एक समान है, इसलिए शुक्र को पृथ्वी का भगिनी ग्रह कहते है।
जल की उपस्थिति के कारण इसे नीला ग्रह भी कहा जाता है।
सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे निकट का तारा प्रॉक्सिमा सेन्चुरी है, जो अल्फा सेन्चुरी समूह का एक तारा है। यह पृथ्वी से 4.22 प्रकाशवर्ष (1 प्रकाशवर्ष = 9.46*1012 किलो मीटर) दूर है।
साइरस या डॉग स्टार पृथ्वी से 9 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है एवं सूर्य से दोगुने द्रव्यमान वाला तारा है। यह रात्रि में दिखाई पड़ने वाला सर्वाधिक चमकीला तारा है।

पृथ्वी और उसका सौर्यिक संबंध

प्रकाश-चक्र (Circle of Illumination): वैसी काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी के प्रकाशित और अप्रकाशित भाग को बाँटती है।

पृथ्वी की गतियाँ : पृथ्वी की दो गतियाँ हैं-

1. घूर्णन (Rotaition) या दैनिक गति: पृथ्वी सदैव अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व घूमती रहती है जिसे पृथ्वी का घूर्णन या परिभ्रमण कहते हैं। इसके कारण दिन व रात होते हैं। अतः इस गति को दैनिक गति भी कहते हैं।